Geeta Jayanti Mahotsav 2020

गीता जयंती महोत्सव क्या होता है  ? What is Gita Jayanti Mahotsav?

गीता जयंती हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ भगवद गीता  के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है गीता जयंती हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह के 11 वें दिन शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है। भारतीय धर्म ग्रंथो के अनुसार माना जाता है कि महाभारत के युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र के मैदान (वर्तमान हरियाणा, भारत) से स्वयं भगवान श्री कृष्ण द्वारा कुंती पुत्र अर्जुन को "भगवद गीता" का  ज्ञान प्रदान  किया गया था।  यह ग्रंथ किसी तीसरे व्यक्ति के द्वारा  लिखा गया है, महाभारत के युद्ध के दौरान जिसे संजय द्वारा राजा धृतराष्ट्र को सुनाया गया था,  भगवत गीता का संवाद श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच में हुआ था।  राजा धृतराष्ट्र के सेवक  संजय को उनके गुरु महृषि वेद व्यास ने आशीर्वाद दिया था कि वे युद्ध के मैदान में होने वाली सभी घटनाओं को दूर से देखने के साथ-साथ आगे अपने नरेश  धृतराष्ट्र को सुना सकते हैं।

Geeta Mahotsav 2020 date

गीता जयंती महोत्सव 2020 इस साल 25 दिसंबर 2020 को मनाया जायेगा।  इस दिन कुरुक्षेत्र में पवित्र ब्रह्मा सरोवर के तट पर पूरी विधि विधान के साथ मनाया जायेगा जिसमे मंत्रोचार किया जायेगा तथा यह का भी आयोजन किया जायेगा।  

Geeta Jayanti 2020 kurukshetra:

इस वर्ष सन 2020 में गीता जयंती 25 दिसंबर 2020 को मनाई जाएगी , यह दिन साल का 360 वां दिन होगा। कोरोना के चलते इस वर्ष बड़ा समारोह होने की सम्भावना कम हैं।  इस वर्ष यह प्रशाशनिक स्तर पर मनाये जाने की सम्भावना है क्योंकि दीपावली के  पश्चात अचानक कोरोना के मरीज़ो की संख्या में बढ़ोतरी हो गयी है जिसके चलते सरकार Geeta jayanti 2020 kurukshetra में मेले के रूप में मनाने से बच सकती है। 

Geeta Jayanti Mahotsav 2020
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अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2020 

गीता जयंती क्यों मनाई जाती है ? Why is Geeta Jayanti celebrated?

हस्तिनापुर में जब पांडवो और कौरवो के बीच सुलह के सभी  प्रयास विफल हो गए तब  युद्ध जरुरी हो गया था। श्री कृष्ण का अपने भक्त और अपने मित्र अर्जुन के लिए बहुत प्रेम था इसी करुणा और सच्चे  प्रेम के कारण  भगवान श्री कृष्ण ने युद्ध के दौरान अर्जुन का  सारथी बनने का फैसला किया था। 
Geeta Jayanti Mahotsav 2020
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जब युद्ध  का दिन आया और दोनों सेनाएं युद्ध के मैदान में आमने-सामने थीं। जैसे ही  लड़ाई शुरू होने वाली थी तभी अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण को दोनों सेनाओं के बीच युद्ध के मैदान के बीच में रथ ले जाने के लिए कहा, ताकि विरोधी सेना पर एक नजर डाली जा सके। जब अर्जुन का रथ दोनों सेनाओं के बीच में आ गया तभी अर्जुन ने अपने पितामह  भीष्म को देखा जो शत्रु सेना के बीच में खड़े थे।   उनको याद आया कि  किस तरह से  पितामह  भीष्म ने  उन्हें बचपन में  बड़े प्यार से पाला था और आज उनसे ही युद्ध करना पड़ रहा है ,  दूसरी और उनके गुरु  द्रोणाचार्य जिन्होंने उन्हें सबसे बड़ा धनुर्धर बनने का प्रशिक्षण दिया था आज वो भी शत्रु सेना के बीच में खड़े थे, जिनको देखकर अर्जुन का दिल पिघलने लगा और उसका शरीर कांपने लगा, उसका मन भ्रमित हो गया।

 वह एक क्षत्रिय (योद्धा) के रूप में अपना कर्तव्य निभाने में असमर्थ महसूस करने लगे। वह यह  सोचकर  कमजोर और बीमार महसूस कर रहे थे  कि उन्हें इस युद्ध  में अपने रिश्तेदारों, अपने मित्रों  और श्रद्धेय व्यक्तियों को मारना पड़ेगा।  जिससे वह बहुत निराश हो गए , और अपने सारथि श्री  कृष्ण को अपने ह्रदय  परिवर्तन के बारे में बताया। उन्होंने  भगवान श्री कृष्ण से आग्रह किया कि वो इस मनोस्तिथि में उनकी आत्मा के भी सारथि बन जाएं और उनका मार्ग दर्शन करे।  तदोपरांत भगवान श्री कृष्ण ने उनका मार्गदर्शन किया और उनको गीता का उपदेश दिया।  

गीता जयंती को पुरे विश्व में भगवान श्री कृष्ण के सभी भक्तों (सनातन धर्म के अनुयायियों) द्वारा मनाया जाता है। , हिन्दू धर्म में भगवद गीता को सबसे पवित्र ग्रन्थ माना जाता है  क्योंकि यह  मनुष्य को जीवन के ग़ूढ रहस्यो के विषय में विस्तार से ज्ञान प्रदान करती है।
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source-amarujala.com

गीता जयंती के मुख्य आयोजन : How is Gita Jayanti celebrated?

भगवत गीता  जयंती   को मुख्यता  गीता के सभी 700 श्लोकों के दिन भर के मंत्र उच्चारण के रूप में देखा जाता है।  बहुत से श्रद्धालु इस दिन उपवास भी रखते हैं क्योंकि यह एकादशी का दिन होता है (एकादशी का व्रत चंद्रमा और अमावस्या का ग्यारहवां दिन होता है) - यह प्रत्येक चंद्र महीने में दो बार होता है  जो  लोग आध्यात्मिक रूप से अपने आप को निखारना  चाहते हैं वो इस दिन व्रत रखते हैं । 

इस दिन हरियाणा राज्य सरकार द्वारा कई बड़े आयोजन किये जाते हैं  जिनमे भजनों और पूजाओं का आयोजन भी होता है। कुरुक्षेत्र में यह त्यौहार भव्य रूप से मनाया जाता है ब्रह्म सरोवर के तट बच्चों को गीता पढ़ने की रुचि को प्रोत्साहित करने के तरीके के रूप में दिखाने के लिए स्टेज प्ले और गीता जप प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। योगी, संन्यासी और विद्वान  इस पवित्र ग्रंथ की वार्ता और आयोजन करते हैं। गीता के सार वाले पत्रक, पुस्तिकाएं और पुस्तकें जनता को वितरित की जाती हैं। इस पवित्र दिन पर गीता की मुफ्त प्रतियां वितरित करना विशेष रूप से शुभ है। 

इस तरह की कुछ मान्यताएं हैं कि  भीष्म पितामह  मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष के युद्ध में घायल होकर गिरे थे, न कि शुक्ल पक्ष के। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की -अष्टमी तिथि पर  राजा धृतराष्ट्र को संजय ने भगवद गीता सुनाई थी  इसलिए कुछ लोग मानते है कि  मार्गशीर्ष कृष्ण-अष्टमी तिथि को भगवद गीता जयंती मनाई जानी चाहिए।

ब्रह्म सरोवर परिसर में हस्तशिल्प कलाकारी मेला 

ब्रह्म सरोवर के विशाल परिषर में फैली हजारो दुकानों में विभिन प्रकार के हस्तशिल्प तथा कपडे , खिलोने, और भी बहुत कुछ की दुकाने लगती हैं जिसमे यात्री खरीददारी करते हैं , इनमे मुख्य कश्मीरी गरम कपडे तथा स्वेटर जर्सी होती हैं  महिलाओ के कपडे भी  बहुत अधिक मात्रा में बिकने आते हैं जिनमे नए फैशन के सूट तथा अन्य वस्त्र होते हैं। 

खाने पीने की भी बहुत अच्छी व्यवस्था होती है  जिसमे हरयाणा के मशहूर ढाबे तथा होटल के व्यंजन शामिल होते हैं।  जिसमे गोहाना के मशहूर देसी घी के जलेब भी शामिल हैं जिनका यात्री खूब आनंद लेते हैं।  
ब्रह्म सरोवर परिसर में एक अलग ही चहल पहल होती है जिससे लोगो का मन झूम जाता है।  स्कूल तथा यूनिवर्सिटी के छात्र छात्राये ग्रुप बनाकर घूमने आते हैं जिनसे माहौल काफी खुसनुमा रहता है।  
सारे हरियाणा से महिलाये तथा पुरुष बच्चे इस मेले में घूमने आते हैं , गीता जयंती पर सम्पूर्ण हरयाणा  हो जाते हैं. 

मन्त्रोनोचार 

लगभग 18,000 बच्चे  हर साल  थीम पार्क कुरुक्षेत्र  में गीता 'श्लोक' का पाठ  करते हैं जिसमे बहुत बड़े बड़े संत समाज के लोग भी शामिल होते है।  पूरे कुरुक्षेत्र शहर में लाउड स्पीकर्स लगाए जाते हैं जिनमे गीता के श्लोको का मन्त्रोनोचार किया जाता है।  जिसका लाइव टेलीकास्ट भी किया जाता है। सभी स्कूलों में इस तरह व्यवस्था की जाती है जिससे सभी बच्चे मन्त्रोनोचार  कार्यकर्म में भाग ले सकें।   
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हरियाणवी संस्कृति समारोह | Haryana Cultural Show on Gita Jayanti

अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में सजे पुरुषोत्तमपुरा बाग में  हरियाणवी संस्कृति  का विशेष प्रदर्शन किया जाता है।  इस मौके पर विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्रा एक से बढ़कर एक हरियाणवी समूह नृत्य की प्रस्तुतियां देते  हैंउनकी  प्रस्तुति से पुरुषोत्तमपुरा बाग हरियाणवी संस्कृति से सराबोर हो उठता है । 
हर बार सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत गीता ज्ञान का संदेश देने वाली सुनो गीता का ज्ञान की जाती है  
दूसरी और हरियाणा की संस्कृति को दर्शाने वाले पंडाल में हरियाणा के गांव के तौर तरीके , जीने की कला, गांव में प्रयोग होने वाली वस्तुएं , खेती के औजार , गांव में पहने जनि वाली पोशाकें , इन सब चीज़ो का बड़े सलीके से प्रदर्शन किया जाता है। इसके अलावा पुरानी खेती की मशीन तथा औजार जो आजकल चलन में नहीं हैं उनका भी प्रदर्शन किया जाता है।
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पंजाबी सिंगर्स स्टेज शो | Punjabi Singers Performance on Gita Jayanti 

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 हर साल  हरियाणा सरकार  द्वारा कुछ पंजाबी कलाकारों को बुलाया जाता है उसी सिलसिले  में 2019 में पंजाबी प्रसिद्ध  गायक गुरदास मान ने स्टेज पर  अपने पंजाबी गीतों से दर्शको को खूब मनोरंजन किया और हिंदी फिल्म अभिनेत्री अमीषा पटेल  ने  कुरुक्षेत्र में 3 से 8 दिसंबर तक चले  अंतर्राष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान स्टेज पर परफॉर्म किया।  
जहां पर अमीषा पटेल ने  देवी रुक्मिणी के विवाह पर आधारित एक नृत्य नाटक का प्रदर्शन किया जिसमे दर्शकों ने  बहुत आनंद  लिया।  
 2019 में  28 राज्यों और नौ केंद्र शासित प्रदेशों के लोक कलाकारों  ने अपनी लोक कलाएं पेश की थी  और कुछ अंतरराष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता शिल्पकार ने  भी  गीता जयंती समारोह 2019 में  अपनी कला का प्रदर्शन किया था।  
 2018  में गीता जयंती समारोह के दौरान प्रसिद्ध अभिनेत्री  हेमा मालिनी ने कुरुक्षेत्र एक ऑडोटोरियम में भरत नाट्यम शास्त्रीय संगीत प्रस्तुत  किया था जिसमे मुख्य अतिथि हरियाणा के मुख्य मंत्री श्री मनोहर लाल थे।
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ब्रह्मा सरोवर की परिक्रमा | Round About of  Divine Brahma Sarovar 

देश विदेश से आये श्रद्धालु पवित्र ब्रह्म सरोवर की परिक्रमा करते हैं।  जो रास्ते में आने वाले मंदिरो में भी पूजा अर्चना करने के साथ साथ मंगल आरती भी करते हैं। लोग ब्रह्म सरोवर परिक्रमा की वीडियो  बनाते हैं। ब्रह्म सरोवर के चारों तरफ परिक्रमा करने में लगभग 4 किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ती है  जो बजुर्गों तथा बच्चों के लिए इतनी आसान नहीं है। 
  ब्रह्मा सरोवर के बहार की परिक्रमा का वीडियो source Youtube 

गीता जयंती  Dates 2020  

गीता जयंती हिंदू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह के 11 वें दिन शुक्ल एकादशी को मनाया जाता है  जो इस वर्ष 25 दिसंबर 2020 को पड़ेगा।   

गीता जयंती महोत्सव तक कैसे पहुंचे ? How to reach Gita Jayanti Venue ?

गीता जयंती का समारोह का आयोजन ब्रह्म सरोवर के तट पर किया जाता है यहां तक पहुँचना बहुत ही सरल है।  पीपली बस स्टैंड से सीधी बस सर्विस की व्यवश्था की जाती है , बस के अलावा बहुत सी ऑटो रिक्सा भी चलती हैं जिसके लिए यात्रियों को इंतज़ार नहीं करना पड़ता। पीपली बस स्टैंड से गीता जयंती समारोह सथल की दुरी करीब 7 KM है।   तथा रेलवे से आने वाले यात्री भी ऑटो रिक्सा या बस से सीधे गीता जयंती सममारोह सथल पर पहुँच सकते हैं।  कुरुक्षेत्र मुख्य रेलवे स्टेशन से ब्रह्म सरोवर की दुरी महज 3  किलो मीटर है।   

गीता जयंती एक्सप्रेस: 11901/11902 | Gita Jayanti Express 


गीता जयंती पर आने वाले तीर्थ यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार स्पेशल ट्रेन  का सञ्चालन करती हैं जिसका नाम गीता जयंती एक्सप्रेस (Gita Jayanti Express) है , जो मथुरा जंक्शन से कुरुक्षेत्र जंक्शन के बीच चलती है।  गीता जयंती एक्सप्रेस 11901/11902 सुपरफास्ट ट्रेन की निगरानी उत्तर मध्य रेलवे जोन के अनुसार की जाती है यह ट्रेन सप्ताह में 2 दिन कुरुक्षेत्र जंक्शन और मथुरा जंक्शन के बीच चलती है। 
ट्रेन कुरुक्षेत्र  और मथुरा के बीच की  कुल दूरी 298 किमी तय करती है जिसकी औसत परिचालन गति 45 किमी / घंटा है। यह  ट्रेन को पूरी दूरी तय करने में लगभग 6 घंटे 40 मिनट का  समय लेती  है और यह यात्रा के दौरान 13 स्टेशनो पर रुकती है। ट्रेन में 12 कोच उपलब्ध हैं और इसमें सामान्य, द्वितीय श्रेणी की सीटिंग और चेयर कार श्रेणी के कोच हैं।

गीता जयंती 2020 पर कोरोना का असर!  | Corona effects on Gita Jayanti 2020

जिस तरह से कोरोना ने अभी तक लगभग सभी फेस्टिवल्स को प्रभावित किया है जिसमे होली, चैत्र नवरात्र , ईद , रक्ष्बंधन इन सभ त्योहारों पर कोरोना की काली छाया पड़ी है और लोग पिछले साल की तरह इस त्यौहार नहीं मना पाए। सूर्य ग्रहण का मेला भी कोरोना के कारण  इस बार कुरुक्षेत्र में नहीं लग पाया जिससे लोगो में बहुत मायुशि देखि गयी।  इस बात को देखते हुए कि शायद इस वर्ष होने वाले गीता जयंती महोत्सव 2020 पर भी कोरोना की काली छाया न पड़ जाये।  

गीता जयंती समारोह के पास अन्य पर्यटन स्थल | Tourist Places Nearby Gita Jayanti Kurukshetra 

गीता जयंती 2020 का समारोह  का आयोजन भव्य ब्रह्म सरोवर के पावन तट पर किया जाता है।  गीता जयंती महोत्सव सथल के नज़दीक बहुत अन्य  पर्यटन स्थल मौजूद हैं सनहित सरोवर (Sanhit Sarovar ) जो यहाँ से  केवल 100 मीटर की दूरी  पर स्तिथ है।  

पैनोरमा (Panorama) की दूरी भी लगभग 100 मीटर ही है , यात्री आराम से पैदल गीता जयंती महोत्सव से  पैनोरमा (Panorama) तक जा सकते हैं। 

श्री कृष्ण संग्रहालय (Shri Krishna Museum)  की दूरी भी लगभग 100 मीटर ही है , यात्री आराम से पैदल गीता जयंती महोत्सव से  श्री कृष्ण संग्रहालय (Shri Krishna Museum) तक जा सकते हैं। यह  पैनोरमा (Panorama) के साथ में ही स्तिथ है दोनों एक दूसरे से सटे होते हैं।   

बिड़ला मंदिर  (Birla Mandir) की दूरी भी लगभग 100 मीटर  है  यह एक प्राचीन मंदिर है जिसमे बहुत श्रद्धालु जाना पसंद करते हैं , यह मुख्या मार्ग के नज़दीक स्तिथ है। यात्री पैदल जा सकते हैं। 
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भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर (Bhadrkali Shaktipeeth Kurukshetra) की दूरी भी लगभग 4 किलोमीटर  है  यह एक प्राचीन मंदिर माँ काली की शक्तिपीठ है  यहाँ पर देश के कोने कोने से श्रद्धालु आते हैं गीता जयंती समारोह से यहाँ पहुंचना काफी सुगम हैं यात्री ऑटो रिक्सा या टैक्सी से यहाँ पहुँच सकते हैं। माँ काली का यह मंदिर पूरे उत्तर भारत में विख्यात है यहाँ पर बड़े बड़े नेता और Celebirity पूजा के लिए आते हैं।  इसकी महिमा अलौकिक है। 
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शेखचिल्ली का मकबरा (Sheikhchilli's Tomb) की गीता जयंती समारोह से दूरी  लगभग 4 किलोमीटर  है यह काफी सूंदर प्राचीन किलानुमा जगह है जहा पर बहुत से लोग घूमने आते हैं। यह किला KDB के अधीन आता है जिसका रख रखाव कुरुक्षेत्र डेवलपमेंट बोर्ड करता हैं। गीता जयंती समारोह से यहाँ पहुंचना काफी सुगम हैं यात्री ऑटो रिक्सा या टैक्सी से यहाँ पहुँच सकते हैं। 
  
ज्योतिसर गीता जन्मस्थल (Jyotisar Gita Born Place) की गीता जयंती समारोह से दूरी लगभग 6 किलोमीटर  है यही वो जगह है जहां पर भगवान श्री कृष्णा ने गीता का उपदेश दिया था। गीता जयंती समारोह से यहाँ पहुंचना काफी सुगम हैं यात्री ऑटो रिक्सा या टैक्सी से यहाँ पहुँच सकते हैं।  यहाँ पर महाभारत कालीन वट वृक्ष आज भी खड़ा है तथा तीर्थ यात्रियों में आकर्षण का केंद्र है।    

सारांश 

गीता जयंती महोत्सव अब कोई मात्र धार्मिक आयोजन  नहीं रह गया है बल्कि यह एक अंतरास्ट्रीय स्तर का एक आयोजन बन चुका  है , अब इसका एक वाणिज्ययीक पहलु भी जिसमे हजारों शॉप मेले में लगायी जाती हैं और करोड़ो की सेल प्रतिदिन होती है।  दूसरी और हरियाणा राज्य सरकार इस मेले को अपनी ताकत दिखाने  के लिए भी उपयोग करती है जिसमे कई VIIP का आयोजन में आना तथा कुछ स्टेज शो का आयोजन शामिल है। लोगो का रुझान इस मेले के प्रति शुरू से ही बहुत अच्छा रहा है क्योंकि मेले का आयोजन पवित्र ब्रह्मसरोवर के तट पर होना इसका मुख्य आकर्षण रहता है। विशाल सरोवर के सामने सभी अन्य प्रबंध फीके नजर आते हैं। 

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