माइग्रेन क्या होता है ? || Migraine kya hota hai ?

माइग्रेन क्या होता है ? || Migraine kya hota hai ?

माइग्रेन एक बहुत ही जटिल बीमारी है यह मनुष्य के सोचने और समझने की शक्ति को कम देता है , इंसान इतने कष्ट  में  रहता है जीवन में मौजूद अन्य सभी सुख मूल्य विहीन हो जाते हैं। माइग्रेन में बार-बार मध्यम से लेकर असहनीय सिरदर्द होता है।  इस पोस्ट में एक संक्षिप्त कोशिश की गयी है इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालने की। माइग्रेन को अधकपारी के नाम से भी जाना जाता है।

 

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 माइग्रेन क्या है ? Migraine kya hai?

जब सिरदर्द सिर के एक हिस्से को प्रभावित करता है सिर में  धुकधुकी जैसी होने लगती है यह दर्द 2 से लेकर 72 घंटों तक लगातार चलता रह सकता है। इस रोग को  इंग्लिश में माइग्रेन कहते हैं तथा हिंदी में अधकपारी कहा जाता है।

माइग्रेन में अक्सर मितली, उल्टी और फोटोफोबिया (रोशनी के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता होना) पाया जाता है।  कई बार फोनोफोबिया (आवाज़  के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता होना) भी इसके लक्षण होते हैं  कई बार जब कोई भी शारीरिक गतिविधि करते हैं तो सिरदर्द शुरू हो जाता है यह भी माइग्रेन के लक्षण होते हैं।

बहुत से रोगियों को औरा लक्षण से ही सिरदर्द होने के संकेत मिल जाते हैं कई बार गैन\\घंटे पहले ही सिरदर्द का पता चल जाता है।


 माइग्रेन के कारण? || Migraine ke causes ?

अधिकतर मामलो में यह रोग आनुवंशिक कारणों से होता है , यदि किसी के माता-पिता को माइग्रेन है तो उनके बचो में माइग्रेन होने के चान्सेस बढ़ जाते हैं। लेकिन कुछ मामलो में माइग्रेन होने की वजह पर्यावरणीय करक भी होते हैं।  यदि कोई बहुत अधिक पर्दूषण के में रह रहा है, या किसी ऐसी जगह पर रहता है जहा पर बहुत तेज गंध वाली बदबू आती है उनमे भी इस रोग के होने की सम्भावना बढ़ जाती है

कई बार घर के आसपास बहुत ज्यादा शोर होने के कारन भी इस बीमारी के चांस बढ़ जाते हैं।

कुछ ऐसे परिवार होते हैं जिनमे सारा दिन लड़ाई झगडे होते रहते हैं उनमे से कोई सबसे अधिक संवेदनशील सदस्य को माइग्रेन हो सकता है।

युवा अवश्था में अस्थिर हार्मोन स्तर भी माइग्रेन में  एक भूमिका निभा सकते हैं,टीनएजर्स में यह लड़कियों को थोड़ा अधिक प्रभावित करता है जबकि लड़को में इसके आसार बहुत काम होते हैं.

 माइग्रेन की रोकथाम की दवाये || Migraine ki medicines

 माइग्रेन के शुरुवाती दिनों में सिरदर्द के लिए ये दवाईया ज्यादा प्रयोग में लायी जाती हैं जैसे आइब्युप्रोफेन और एसिटामिनोफेन (Ibuprofen +Paracetamol /Acetaminophen टेबलेट), Nimesulide टेबलेट्स का भी उपयोग किया जाता है, Nimesulide + Paracetamol जैसे Laanim Plus Tablet इसमें काफी फायदेमंद रहती है।

Migraine kya hota hai
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भारतीय प्राचीन शास्त्र आयुर्वेद में माइग्रेन को अर्धावभेदक कहा गया है।

 आयुर्वेद के अनुसार अधिक मात्रा में भोजन, अध्यशन (बार बार खाना खाना ), पूर्वी वायु (पूर्व दिशा से चलने वाली हवा ), अवश्याय (ओस), अतिमैथुन (अत्यधिक हस्त मैथुन ),  मल-मूत्र के वेग को रोकना , परिश्रम अतिव्यायाम के कारण हुए वात दोष, तथा कफ दोष के साथ मिल कर सिर  के आधे भाग को जकड लेते हैं , भृकुटी, शंखप्रदेश, कर्ण, नेत्र ललाट के अर्ध भाग में शस्त्र से काटने तथा अरणी मन्थन के समान तीव्र दर्द होता हैइस से अर्धावभेदक की उत्पत्ति होती है।

माइग्रेन में ऑरा चरण(प्रोड्रोम

माइग्रेन के आधे से ज्यादा  मरीज़ों में ऑरा लक्षण पाए जाते हैं जिनमें रोगी को दर्द शुरू होने से 1 घंटा से लेकर 2 दिन पहले तक पता चल जाता है कि निकट भविष्य में सिर दर्द हो सकता है। इन लक्षणों में कई तरह के शारीरिक बदलाव सकते हैं जैसे मूड में  बदलाव, चिड़चिड़ापन शुरू होना , अवसाद या बहुत ख़ुशी , या थकानमांसपेशीय जकड़न (विशेष रूप से गर्दन में), कब्ज़ होना  या दस्त  लग जाना शामिल है। यह परिवर्तन ऑरा के साथ माइग्रेन वाले लोग या ऑरा के बिना माइग्रेन वाले लोगों में भी हो सकता है।

 दर्द का चरण 

इस रोग में अक्सर सिरदर्द एक तरफ से शुरू होता है यह शूल की तरह चुभने वाला होता है, शुरुवात में  मध्यम से गंभीर तीव्रता की और बढ़ता चला जाता  है। यह धीरे-धीरे सिर में फैलता है और जैसे जैसे  शारीरिक गतिविधि  होती हैं यह बढ़ता चला जाता है।

कुछ  मामलो में यह दर्द गर्दन के साथ  सिर के दोतरफा हो सकता है खासकर जिन लोगों को बिना ऑरा  लक्षण के माइग्रेन होता है उनमें दोतरफा सिरदर्द होता है

बहुत कम संख्या में  शुरुआत में सिर के ऊपर या पीठ में दर्द  होता है। वयस्कों में आमतौर पर यह  दर्द 4 से 72 घंटों तक लगातार बना रहता है जबकि टीनेजर्स में  बच्चों में यह 1 घंटे में  समाप्त हो जाता है इस  दर्द  की प्रवृति भिन्न-भिन्न होती है

पोस्टड्रोम प्रभाव

अकसर माइग्रेन का असर मुख्य सिरदर्द ख़त्म होने के बाद कुछ दिनों या सप्ताह तक बना रहता है जिसे माइग्रेन पोस्टड्रोम कहा जाता है। इस प्रभाव में कुछ लोग सिर और गर्दन में दर्द  होने का अनुभव करते रहते हैं तथा कुछ लोगों को माइग्रेन का दर्द समाप् होने के बाद कुछ दिनों तक सोचने की क्षमता को बाधित  महसूस करते हैं।

कई रोगियों को शारीरक थकान या ‘‘नशा ’’ जैसी  हालत का एहसास रहता  है  इसके साथ साथ  उन्हें  सिर में दर्द, पेट में कब्ज़ या दस्त, मूड ख़राब और अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है।

माइग्रेन निदान || migaraine ka nidaan

माइग्रेन एक ऐसी बीमारी है जिसका निवारण बहुत सटीक और परमानेंट नहीं है।  वास्तव में इसका  निदान कारणों और लक्षणों पर आधारित है। अंतरराष्ट्रीय सिरदर्द सोसायटी के अनुसार ऑरा लक्षणों के बिना माइग्रेन  रोगियों  का निदान निम्नलिखित अनुसार किया जा सकता है:

  •  रोगी को पांच या अधिक दौरे,ऑरा  लक्षणों के साथ माइग्रेन के निदान के लिये केवल दो दौरे ही पर्याप्त हैं।
  • सिरदर्द की अवधि चार घंटे से तीन दिन तक हो सकती है
  • एकतरफा सर दर्द  (आधा सिर प्रभावित)
  • उपरोक्त सभी प्रकार के लक्षणों वाले रोगी को माइग्रेन की संभावना 92% होती है।

माइग्रेन  के लिए अक्सर रोका या कंट्रोल किया जा सकता है  इसके लिए विभिन्न प्रकार की दवायें काम में लायी जाती हैं.दवाईयों के साथ साथ पोषक तत्वों  संतुलित भोजन और फ़ूड सप्लीमेंट भी काफी सहायक होते हैं।

केवल Medicines या अच्छी Diet के साथ Lifestyle में परिवर्तन से भी काफी रहत मिलने की गुंजाइश है। कुछ  मामलो में सर्जरी की भी सलाह दी जाती है जिसमे  दवाई से रोकथाम मुमकिन रह जाये तब सर्जरी की बात की जाती है 

  • धड़कता हुआ सिरदर्द 
  • दर्द की मध्यम से गंभीर तीव्रता कि और बढ़ता है 
  • दर्द अक्सर नियमित शारीरिक गतिविधि द्वारा उत्तेजना या परिहार के कारण शुरू होता हो 
  • रोगी को मतली और/या उल्टी आना ,प्रकाश (फोटोफोबिया) और ध्वनि (फोनोफोबिया) दोनों के प्रति संवेदनशीलता

माइग्रेन की कुछ दवाएं || migraine ki kuchh medicines

आमतौर पर माइग्रेन को रोकने वाली दवायें तभी कारगर मानी जाती हैं यदि वे माइग्रेन के दौरे की गंभीरता या प्रभाव को 50% या उस से अधिक तक कम कर दें।जैसे Toperamate (टोपिरामेट) Divalporex/Sodium Valporate (डाइवेल्प्रोएक्स/सोडियम वैल्प्रोएट) Propanalol ( प्रोप्रानोलॉल) और Metaprolol (मेटोप्रोलॉल) के उपयोग माइग्रेन में काफी हद तक सफल हैं, क्योंकि ये सभी दवाईया इस रोग में लम्बे समय से कारगर सिद्ध रही हैं.

 दूसरी तरफ Gabapentin ( गाबापेंटिन )इस बीमारी में इतनी विश्वश्य्नीय नहीं रही, क्योंकि कई बार इसके Result बेहतरीन रहते हैं और कुछ रोगी पर बहुत ही कम।  जबकि Timalol (टिमेलॉलमाइग्रेन में एक बेहतरीन दवा सिद्ध हुयी है इसने लगातार कुछ उम्दा Result दिए हैं

 Amitryptiline and Venlefaxine (ऐमीट्रिप्टाइलीन और वेनलेफैक्साइनदवाओं का इस्तेमाल माइग्रेन में बहुत अच्छा काम करता है जब माइग्रेन काफी पुराना हो तब यह और भी अछि सिद्ध हुई हैं.  

माइग्रेन में एनाल्जेसिक (दर्द निवारक दवायें) का महत्त्व|| Analgesics in Migraine

 बहुत सी साधारण Analgesics (एनेल्जेसिक) (NSAIDs) या  Paracetamol (पेरासिटामोल)+Aspirin (एस्पिरिन) +Caffeine ( कैफीनका Combination  शुरुआती  से  मध्यम लक्षणों वाले माइग्रेन के रोगियों  के लिये Prescribed (अनुशंसित) शुरुआती उपचार माना जाता हैं। इसी तरह Ibuprofen  use भी बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है और इसके परिणाम भी बहुत अच्छे पाए  गए हैं।

दूसरी तरफ Diclofenac का Paracetamol के साथ combination भी शुरुवाती माइग्रेन लक्षणों में काफी फायदेमंद रहता है , लेकिन Diclofenac Sodium high Blood Pressure के रोगियों में सुरक्षित नहीं है।

 वहीं Aspirin (एस्पिरिन) शुरुवाती माइग्रेन दर्द  हद मध्यम तक  गंभीर माइग्रेन दर्द में Instant Relief  राहत प्रदान करती है , Aspirin भी Sumatriptan (सुमाट्रिप्टान) की तरह माइग्रेन में काम करती है दोनों की Effectiveness लगभग बराबर होती है

Ketarolac ( केटोरोलैक) एक अंतःशिरा यौगिक (सेडेटिव) के रूप में कार्य करती है यह दर्द को काम न करके भुलाने का काम करती है।Paracetamol  पैरासेटामॉल+ Metoclopramide ( मेटोक्लोप्रामाइड) combination में माइग्रेन दर्द पर काफी प्रभावी असर करती है. विशेषकर वो महिलाये  जो  गर्भावस्था में हैं उनके लिए  Paracetamol  पैरासेटामॉल+ Metoclopramide ( मेटोक्लोप्रामाइड) combination काफी  सुरक्षित रहते हैं हालाँकि तीसरे तिमाही के पहले तक NSAIDs भी सुरक्षित मानी जाती हैं।

 सारांश 

माइग्रेन एक बहुत ही पीड़ादायक बीमारी है।  इसके रोगी का जीवन बहुत बड़ा कष्टकारी  बन जाता है माइग्रेन का दर्द पथरी के दर्द के सामान असहनीय होता है।  इसके दर्द का शाब्दिक वर्णन बहुत मुश्किल है।  इसका दर्द  को झकझोर देता हैसुख फीके लगने लगते लगते हैं।   माइग्रेन का प्रबंधन जीवन में अमूल चमूल परिवर्तन के साथ किया जाना चाहिए जिसमे Lifestyle में बदलाव बहुत जरुरी  खानपान तथा तनाव में जीने की आदत को छोड़ना बहुत आवश्यक हैपरेशानियों को मन पर हावी रखना भी इसको बढ़ता है , इसलिए मन हल्का और व्यस्त रखे।

बेहतर खुराक और काम मोबाइल का इस्तेमाल बहुत फायदा दे सकता है।  इवनिंग walk से भी रहत मिलने के आसार हैं क्योंकि इस से मन को शांति मिलती है और अकेले में घूमना अपने आप से मिलने की वजह बन सकता है

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